गया जिला-(Gaya City)

How and When this City came to existence

In ancient times,There Lived A Powerful Demon named Gayasura, who was a great devotee of Lord Vishnu. He had worried the Gods with his penance. On his prayer, Lord Vishnu and all the other Gods came to Gayasur to break his penance and asked for a boon. Gayasur asked for the boon of becoming more sacred than the Gods and Goddesses.As soon as the boon was received, the situation became such that even grave sinners started going to heaven just by seeing or touching it. Seeing this Dharamraj also became worried.To deal with this problem, the Gods deceitfully asked for the entire body of Gayasur in the name of a yagya. To give his body, Gayasur lay down with his feet towards the north and his face towards the south. It is believed that his body was spread over five kos, hence the land of that five kos was named Gaya. Due to the virtuous influence of Gayasur, that place became established as a pilgrimage site. Gaya earlier had 360 altars with various names but now only 48 of them remain.Generally, it is considered necessary to perform Pind Daan on these altars, at Vishnupad temple and at Akshayavat on the banks of river Falgu. Apart from this, Naukut, Brahyoni, Vaitarani, Mangalagauri, Sitakund, Ramkund, Nagkund, Pandushila, Ramshila, Pretshila and Kagbali etc. are also the main places of Pind Daan.

Gaya has experienced the rise and fall of many dynasties in the Magadha region. Gaya has had an important place in the cultural history of the region, spanning approximately 2300–2400 years, from the 6th century BC to the 18th century AD.Emperor Bimbisara, who lived and ruled in 519 BCE, introduced Gaya to the outside world. Having achieved an important place in the history of civilization, this region experienced the bliss of Gautam Buddha and Lord Mahavira during the reign of Bimbisara. After a short period of the Nanda dynasty, Gaya and the entire Magadha region came under the rule of Ashoka (272 BC – 232 BC).With the adoption of Buddhism it came under Maurya rule. He visited Gaya and built the first temple at Bodhgaya to commemorate the attainment of supreme enlightenment of Prince Gautama.As a result of the British victory in the Battle of Buxar in the year 1764, the civil and revenue rights of Bihar went into the hands of the British Company. In 1947, Gaya also got independence along with other provinces of the country. Till 1864, Gaya remained a part of the then Behar and Ramgarh districts. Gaya was recognized as a full district in 1865. Last year in 1976, Gaya district was divided and two new districts – Aurangabad and Nawada were created.Later, in May 1981, Magadh Division was created by the Bihar State Government by including four districts of Gaya, Nawada, Aurangabad and Jehanabad. It may be noted that all these districts used to be sub-divisions before the formation of Gaya district in the year 1865.

प्राचीन काल में गयासुर नामक एक शक्तिशाली असुर भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था। उसने अपनी तपस्या से देवताओं को चिंतित कर रखा था। उनकी प्रार्थना पर भगवान विष्णु व अन्य समस्त देवता गयासुर की तपस्या भंग करने उसके पास पहुंचे और वरदान मांगने के लिए कहा। गयासुर ने स्वयं को देवी-देवताओं से भी अधिक पवित्र होने का वरदान मांगा। वरदान मिलते ही स्थिति यह हो गई कि उसे देख या छू लेने मात्र से ही घोर पापी भी स्वर्ग में जाने लगे। यह देखकर धर्मराज भी चिंतित हो गए। इस समस्या से निपटने के लिए देवताओं ने छलपूर्वक एक यज्ञ के नाम पर गयासुर का संपूर्ण शरीर मांग लिया। गयासुर अपना शरीर देने के लिए उत्तर की तरफ पांव और दक्षिण की ओर मुख करके लेट गया। मान्यता है कि उसका शरीर पांच कोस में फैला हुआ था इसलिए उस पांच कोस के भूखण्ड का नाम गया पड़ गया। गयासुर के पुण्य प्रभाव से ही वह स्थान तीर्थ के रूप में स्थापित हो गया। गया में पहले विविधि नामों से 360 वेदियां थी लेकिन उनमें से अब केवल 48 ही शेष बची हैं। आमतौर पर इन्हीं वेदियों पर विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी के किनारे अक्षयवट पर पिण्डदान करना जरूरी समझा जाता है। इसके अतिरिक्त नौकुट, ब्रह्योनी, वैतरणी, मंगलागौरी, सीताकुंड, रामकुंड, नागकुंड, पांडुशिला, रामशिला, प्रेतशिला व कागबलि आदि भी पिंडदान के प्रमुख स्थल हैं।

गया ने मगध क्षेत्र में कई राजवंशों के उत्थान और पतन का अनुभव किया है। छठी शताब्दी ईसा पूर्व से 18वीं शताब्दी ईस्वी तक, लगभग 2300-2400 वर्षों से, इस क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में गया का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। सम्राट बिंबिसार , जो 519 ईसा पूर्व में रहते थे और शासन करते थे, ने गया को बाहरी दुनिया में पेश किया था। सभ्यता के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करने के बाद, इस क्षेत्र ने बिम्बिसार के शासनकाल के दौरान गौतम बुद्ध और भगवान महावीर के आनंद का अनुभव किया । नंद वंश के थोड़े समय के बाद , गया और संपूर्ण मगध क्षेत्र अशोक (272 ईसा पूर्व - 232 ईसा पूर्व) बौद्ध धर्म को अपनाने के साथ मौर्य शासन के अधीन आ गया । उन्होंने गया का दौरा किया और राजकुमार गौतम की सर्वोच्च ज्ञान प्राप्ति की स्मृति में बोधगया में पहला मंदिर बनाया । वर्ष १७६४ में बक्सर के युद्ध में अंग्रेजों की जीत के परिणामस्वरूप बिहार का दीवानी और राजस्व अधिकार अंग्रेज कंपनी के हाथ चला गया। सन १९४७ में देश के अन्य प्रान्तों के साथ गया को भी आज़ादी मिली ! सन १८६४ तक गया तत्कालीन बेहार तथा रामगढ जिलों का हिस्सा बना रहा ! सन १८६५ में गया को एक पूर्ण जिले के रूप में मान्यता प्राप्त हुआ ! बिगत वर्ष १९७६ में गया जिला को बिभक्त कर दो नए जिलों – औरंगाबाद एवं नवादा का सृजन किया गया ! कालान्तर में मई, १९८१ में बिहार राज्य सरकार द्वारा गया, नवादा, औरंगाबाद एवं जहानाबाद कुल चार जिलों को सम्मिलित करते हुए मगध प्रमंडल का सृजन किया गया ! बिदित हो कि ये सभी जिलें वर्ष १८६५ में गया जिले के गठन के पूर्व तक अनुमंडल हुआ करता था !

How To Reach Here

Every Month, thousands of People visit this place.

The City is a famous pilgrimage site for Hindus and Buddhists.

Gaya Railway Station

Gaya Railway Junction is well connected to all parts of India and you can easily Come here from any city of India by railways.

Gaya International Airport

Gaya International Airport gives both domestic as well as International Flight Services.Daily Flights to all metros is going on.